वैश्विक इकाइयाँ

विदेशों में हिन्दी प्रचार-प्रसार का सशक्त अभियान

हिन्दी केवल भारत की राजभाषा ही नहीं, बल्कि विश्वभर में करोड़ों लोगों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन चुकी है। वर्तमान समय में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार एवं विस्तार के लिए अनेक संस्थाएँ कार्यरत हैं, जिनमें मातृभाषा उन्नयन संस्थान का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। संस्थान ने भारत की सीमाओं से बाहर भी हिन्दी की अलख जगाने और हिन्दी प्रेमियों को एक मंच पर जोड़ने का सराहनीय कार्य किया है।

मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा विभिन्न देशों में हिन्दी के प्रचार हेतु समर्पित “हिन्दीयोद्धाओं” का एक सशक्त नेटवर्क तैयार किया गया है। ये हिन्दी सेवक अपने-अपने देशों में भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर सक्रिय हैं।

अमेरिका (यूएसए) में संस्थान हिन्दी यूएसए के साथ संयुक्त रूप से कार्य कर हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार को नई दिशा प्रदान कर रहा है। वहीं दुबई (यूएई) में डॉ. नितिन उपाध्ये हिन्दी गतिविधियों के माध्यम से भारतीय भाषा और संस्कृति को मजबूत आधार दे रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया में डॉ. प्रगीत कुँअर एवं डॉ. भावना कुँअर के नेतृत्व में हिन्दी के विविध कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही डॉ. कुँअर बेचैन स्मृति न्यास, ऑस्ट्रेलिया के सहयोग से साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहन मिल रहा है।

यूरोप में नार्वे की श्रीमती इंदु नांदेल हिन्दी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वहीं पड़ोसी देश नेपाल में श्रीमती इंदु तोड़ी हिन्दी भाषा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रसार के लिए सक्रिय हैं।
इन सभी प्रयासों से स्पष्ट है कि हिन्दी अब केवल भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक वैश्विक भाषा के रूप में अपनी पहचान बना रही है। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के ये प्रयास हिन्दी को विश्व मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक कदम हैं।

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