गणतंत्र ओजस्वी
राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, मातृभाषा उन्नयन संस्थान, भारत

गणतंत्र जैन “ओजस्वी” समकालीन हिंदी साहित्य, शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों के क्षेत्र में एक सक्रिय एवं सम्मानित नाम हैं। आपका जन्म 26 जनवरी 1983 को मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले के खरगापुर में हुआ। आप श्री सुरेन्द्रकुमार जैन एवं श्रीमती नीरा जैन के सुपुत्र हैं। पारिवारिक संस्कारों और साहित्यिक वातावरण ने आपके व्यक्तित्व को संवेदनशील, चिंतनशील और सृजनशील बनाया।
आपने शास्त्री, शिक्षा शास्त्री (बी.एड.), एम.ए., एम.एड., एल.एल.बी. तथा नेट जैसी उच्च शैक्षणिक उपाधियाँ प्राप्त की हैं। वर्तमान में आप बाबू जुगल किशोर जैन “युगल” के साहित्य पर समीक्षात्मक अध्ययन विषय पर पीएच.डी. शोध कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में आप एम.डी. जैन इंटर कॉलेज, हरीपर्वत, आगरा में हिंदी-संस्कृत विषय के सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं।
लेखन, पठन-पाठन और मंच संचालन आपकी प्रमुख अभिरुचियाँ हैं। आपकी प्रकाशित कृतियों में ‘अन्तर्ध्वनि’ (कविता संग्रह) तथा ‘सिद्धिप्रिय स्तोत्र’ (पद्यानुवाद) विशेष उल्लेखनीय हैं, जबकि ‘अग्निशिखा’ कविता संग्रह प्रकाशनाधीन है। इसके अतिरिक्त अनेक आलेख, कविताएँ तथा तीन साझा काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।
साहित्यिक क्षेत्र में आपका योगदान बहुआयामी है। आपने “ध्रुवधाम” मासिक पत्रिका का चार वर्षों तक सफल प्रबंध संपादन किया तथा अनेक पुस्तकों का संपादन भी किया। “ओजस्वी मंच” और “ध्रुवधाम मीडिया” की स्थापना कर आपने युवा प्रतिभाओं को अभिव्यक्ति और मंच प्रदान किया। आकाशवाणी, राष्ट्रीय चैनलों, कवि सम्मेलनों और राष्ट्रीय सेमिनारों में आपकी सक्रिय सहभागिता रही है।
वर्तमान में आप मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हैं तथा पूर्व में राष्ट्रीय सचिव का दायित्व भी निभा चुके हैं। “काव्य कृष्ण सम्मान”, “साहित्य प्रज्ञा सम्मान”, “भाषा सारथी सम्मान” सहित अनेक सम्मान आपकी साहित्य साधना की पहचान हैं।
आपका मानना है कि मन के सोए हुए विचारों को शब्दों में ढालना स्वयं को समझने और नए विचारों को जन्म देने का सबसे सशक्त माध्यम है। यही विचारधारा आपके साहित्य और जीवन को निरंतर ऊर्जा प्रदान करती है।
