लघुकथा मन्थन

लघुकथा मन्थन : लघुकथा विधा के संवर्धन का राष्ट्रीय मंच

हिन्दी भाषा और साहित्य के विकास में लघुकथा विधा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। समय के साथ यह विधा अपनी संक्षिप्तता, प्रभावशीलता और समकालीन सरोकारों के कारण पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हुई है। इसी विधा के प्रचार-प्रसार, विमर्श और सृजनात्मक उन्नयन के उद्देश्य से वर्ष 2022 से प्रतिवर्ष हिन्दी माह सितम्बर के दौरान मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा ‘लघुकथा मन्थन’ का आयोजन किया जाता है।

हिन्दी दिवस 14 सितम्बर को पूरे देश में मनाया जाता है। इसी अवसर पर अथवा इसके आसपास आयोजित होने वाला लघुकथा मन्थन देशभर के लघुकथाकारों, साहित्यकारों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों का एक महत्वपूर्ण संगम बन चुका है। यह आयोजन केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लघुकथा विधा के विभिन्न आयामों पर गंभीर चिंतन और संवाद का मंच है। चार सत्रों में चलने वाले इस आयोजन में लघुकथा विषयक संगोष्ठियाँ, विमर्श सत्र, लघुकथा पाठ, पुस्तक विमोचन, सम्मान समारोह तथा साहित्यिक चर्चाओं का आयोजन किया जाता है। वरिष्ठ एवं नवोदित लघुकथाकार एक साथ उपस्थित होकर अपने अनुभव साझा करते हैं और समकालीन विषयों पर लिखी गई लघुकथाओं का पाठ करते हैं। इससे नई पीढ़ी के रचनाकारों को मार्गदर्शन प्राप्त होता है तथा साहित्यिक संवाद को नई दिशा मिलती है।

लघुकथा मन्थन का एक प्रमुख उद्देश्य लघुकथा के साहित्यिक मूल्य, उसकी रचनात्मक संभावनाओं और सामाजिक प्रभाव पर गंभीर चर्चा करना है। इस मंच पर लघुकथा के इतिहास, वर्तमान और भविष्य को लेकर विचार-विमर्श होता है, जिससे विधा के विकास की नई संभावनाएँ सामने आती हैं। वास्तव में, लघुकथा मन्थन हिन्दी साहित्य की इस महत्वपूर्ण विधा को नई ऊर्जा प्रदान करने वाला राष्ट्रीय आयोजन है। यह न केवल रचनाकारों को जोड़ता है, बल्कि हिन्दी भाषा और साहित्य के संवर्धन में भी उल्लेखनीय भूमिका निभाता है।

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