मणिमाला शर्मा
राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, मातृभाषा उन्नयन संस्थान, भारत

श्रीमती मणिमाला शर्मा शिक्षा, साहित्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी एक सम्मानित एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं। आपका जन्म 8 अगस्त को मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक नगर मंदसौर में हुआ। आप स्वर्गीय डॉ. जी. एल. समाधिया की सुपुत्री हैं, जिनसे आपको ज्ञान, अनुशासन और सामाजिक मूल्यों की अमूल्य प्रेरणा प्राप्त हुई। आपने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त करते हुए एम.ए. एवं बी.टी. की उपाधियाँ अर्जित कीं। शिक्षा के प्रति आपकी गहरी निष्ठा ने आपको शासकीय सेवा में शिक्षक एवं छात्रावास (होस्टल) वार्डन के रूप में उत्कृष्ट कार्य करने का अवसर प्रदान किया। अपने सेवाकाल में आपने न केवल विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की, बल्कि उनके व्यक्तित्व निर्माण और नैतिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्तमान में आप सेवानिवृत्त जीवन व्यतीत कर रही हैं, किंतु सामाजिक एवं साहित्यिक गतिविधियों में आपकी सक्रियता निरंतर बनी हुई है। आपका वैवाहिक जीवन पूर्व प्राचार्य श्री नवीन जी के साथ रहा, जिनके सहयोग और प्रोत्साहन ने आपके शैक्षिक एवं सामाजिक कार्यों को नई दिशा प्रदान की। साहित्य के क्षेत्र में भी आपकी विशेष रुचि रही है। आपने “माँ” नामक साझा काव्य संग्रह का सफल संपादन कर साहित्यिक जगत में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। यह कृति मातृत्व की संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों को अभिव्यक्त करने वाला महत्वपूर्ण साहित्यिक प्रयास माना जाता है। वर्तमान में आप मातृभाषा उन्नयन संस्थान की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य के रूप में हिंदी भाषा एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इंदौर निवासी श्रीमती मणिमाला शर्मा का व्यक्तित्व शिक्षा, साहित्य, सेवा और संस्कारों का सुंदर समन्वय है। उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक प्रकाशस्तंभ के समान है।
