भावना शर्मा
राष्ट्रीय सचिव, मातृभाषा उन्नयन संस्थान, भारत

25 नवंबर 1984 को दिल्ली में जन्मी भावना शर्मा समकालीन हिन्दी साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में एक सशक्त और सक्रिय हस्ताक्षर हैं। हिन्दी विषय में स्नातक व स्नातकोत्तर शिक्षा के साथ बी.एड., अनुवाद में पीजी डिप्लोमा तथा मल्टीमीडिया एवं वेब डिज़ाइनिंग में प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने साहित्य और संचार के विविध आयामों को साधा है। वर्तमान में वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान, भारत की राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्यरत हैं तथा वृंदा प्रकाशन और आरंभव की संस्थापिका हैं। संस्मय प्रकाशन की निदेशक, साहित्य ग्राम मासिक और मातृभाषा डॉट कॉम की सह-संपादक तथा हिन्दीग्राम की संयोजक के रूप में वे हिन्दी के प्रचार-प्रसार में निरंतर संलग्न हैं। लेखिका, अनुवादक, विचारक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उनकी बहुआयामी पहचान स्थापित है। ‘घर-घर पुस्तकालय अभियान’ की राष्ट्रीय संयोजक के रूप में उन्होंने 10,000 से अधिक घरों और कार्यालयों में पुस्तकालय स्थापित करवाकर पठन-संस्कृति को नई दिशा दी है। हिन्दी को राष्ट्रभाषा का सम्मान दिलाने के लिए वे एक समर्पित ‘हिन्दी योद्धा’ के रूप में सक्रिय हैं।
महिला और बाल कल्याण के क्षेत्र में उनकी सेवाएँ उल्लेखनीय रही हैं, विशेषकर कोरोना काल में उन्होंने हज़ारों ज़रूरतमंदों तक सहायता पहुँचाई। रंगमंच से भी उनका गहरा जुड़ाव रहा है। उनकी प्रमुख कृतियों में कहानी संग्रह ‘अतुल्य रिश्ते’ (जिसका ऑडियो रूपांतरण भी किया गया) और ‘बुनकारी’ शामिल हैं। उनकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं, साथ ही वे कई पुस्तकों के संपादन और ध्वनांकन से भी जुड़ी रही हैं। उनके साहित्यिक और सामाजिक योगदान के लिए उन्हें ‘भारत गौरव रत्न’, ‘साहित्य-शिरोमणि’, ‘राष्ट्र भाषा गौरव’, ‘महादेवी वर्मा सम्मान’ तथा ‘प्राइड ऑफ़ इंडिया अवॉर्ड’ सहित 30 से अधिक राष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है। ‘घर-घर पुस्तकालय अभियान’ के लिए भी वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा उन्हें सम्मान से सम्मानित किया गया है। हिन्दी और समाज के प्रति उनका समर्पण उन्हें एक प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करता है- जहाँ शब्द केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि परिवर्तन का माध्यम बन जाते हैं।
