हिन्दी कवि सम्मेलन शताब्दी वर्ष

हिन्दी कवि सम्मेलन शताब्दी वर्ष मनाना– 1923-2023

भारत का पहला कवि सम्मेलन साल 22 सितम्बर, 1923 गयाप्रसाद ‘सनेही’ जी ने कानपुर में आयोजित करवाया था। इसमें 27 कवियों ने भाग लिया। इसके बाद कवि सम्मेलन की परंपरा देश-दुनिया में चल निकली। आज अमेरिका, कनाडा, दुबई जैसे लगभग ढाई दर्जन देशों में हिन्दी कवि सम्मेलन बड़े चाव से सुने जाते हैं। सनेही जी की अध्यक्षता में पूरे देश में सैंकड़ो कवि सम्मेलन हुए। उनके संरक्षण में कवियों ने खुलकर मंच पर देश की आज़ादी के लिए योगदान दिया। कवि सम्मेलन के इस समृद्ध इतिहास बोध से जनमानस को परिचित करवाने के उद्देश्य से मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा देशभर में कवि सम्मेलन शताब्दी वर्ष का उत्सव मनाया जो अकादमी रूप से भी और जनजागरण के निमित्त भी सार्थक रहा। संस्थान द्वारा बनवाया कवि सम्मेलन शताब्दी वर्ष का प्रतिक चिन्ह स्वामी रामदेव जी ने हरिद्वार में लोकार्पित किया। वर्ष भर संस्थान द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में, गांवों और शहरों में काव्य उत्सव, कवि सम्मेलन आयोजित किए गए। सौ से अधिक कवियों को स्वर्णाक्षर सम्मान व काव्य दीप सम्मान से सम्मानित किया गया। इस निमित्त विश्वविद्यालयों, महाविद्यालओं में व्याख्यान श्रृंखला आयोजित की गई। इस तरह संस्थान द्वारा देशभर में कवि सम्मेलन शताब्दी वर्ष निमित्त सैकड़ों आयोजन कर जनजागरण किया।

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