हस्ताक्षर बदलो अभियान

भाषा केवल संचार का माध्यम ही नहीं होती, बल्कि वह किसी भी समाज की संस्कृति, परंपरा और पहचान का आधार होती है। जिस प्रकार किसी राष्ट्र की पहचान उसकी संस्कृति, इतिहास और मूल्यों से होती है, उसी प्रकार भाषा भी उस राष्ट्र की आत्मा मानी जाती है। भारत जैसे बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक देश में मातृभाषाओं का संरक्षण और सम्मान अत्यंत आवश्यक है। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा “हस्ताक्षर बदलो अभियान” का आरम्भ किया गया, जिसका उद्देश्य लोगों को अपने हस्ताक्षर अंग्रेज़ी के स्थान पर हिन्दी अथवा किसी भारतीय भाषा में करने के लिए प्रेरित करना है।

हस्ताक्षर व्यक्ति के कार्यकारी जीवन की सबसे छोटी किन्तु अत्यंत महत्वपूर्ण इकाई है। बैंक, सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य औपचारिक कार्यों में हस्ताक्षर व्यक्ति की पहचान और स्वीकृति का प्रतीक होते हैं। यदि यही हस्ताक्षर अपनी मातृभाषा या किसी भारतीय भाषा में किए जाएँ, तो यह भाषा के सम्मान और स्वाभिमान को बढ़ाने का एक सरल लेकिन प्रभावशाली माध्यम बन सकता है। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए मातृभाषा उन्नयन संस्थान ने इस अभियान की शुरुआत की।

इस अभियान का शुभारम्भ वर्ष 2017 में इंदौर शहर से हुआ। प्रारम्भ में यह एक छोटा प्रयास था, लेकिन धीरे-धीरे यह जनआंदोलन का रूप लेने लगा। संस्थान से जुड़े हिन्दी योद्धाओं ने देशभर में जनजागरण अभियान चलाकर लोगों को अपनी भाषा के महत्व के प्रति जागरूक किया। उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों, सभाओं, सामाजिक मंचों और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से लोगों को यह समझाया कि यदि हम अपने हस्ताक्षर भी अपनी भाषा में नहीं करेंगे, तो भाषा के प्रति हमारा आत्मीय संबंध कमजोर हो सकता है।

इस अभियान का प्रभाव अत्यंत प्रेरणादायक रहा। सैकड़ों नहीं, हजारों नहीं बल्कि लाखों लोगों ने अपने हस्ताक्षर अंग्रेज़ी से बदलकर हिन्दी या अन्य भारतीय भाषाओं में करना शुरू कर दिया। जो लोग पहले बैंक और अन्य सरकारी कार्यों में अंग्रेज़ी में हस्ताक्षर करते थे, वे अब गर्व के साथ हिन्दी में हस्ताक्षर करने लगे हैं। इससे न केवल भाषा के प्रति सम्मान बढ़ा है, बल्कि लोगों में सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रबोध की भावना भी सुदृढ़ हुई है।

हस्ताक्षर बदलना देखने में एक छोटा-सा कदम लग सकता है, लेकिन इसका प्रभाव बहुत व्यापक है। जब कोई व्यक्ति अपनी मातृभाषा में हस्ताक्षर करता है, तो वह अपने भीतर भाषा के प्रति गर्व और आत्मविश्वास का अनुभव करता है। यह कदम समाज में एक सकारात्मक संदेश भी देता है कि हमें अपनी भाषाओं का सम्मान करना चाहिए और उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाना चाहिए।

वर्तमान समय में इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हो रहा है। अब तक लगभग 35 लाख से अधिक लोगों ने प्रतिज्ञा-पत्र के माध्यम से हिन्दी में हस्ताक्षर करने का संकल्प लिया है। इसके साथ ही देशभर में लगभग 15 हजार से अधिक हिन्दी योद्धा लगातार इस अभियान के प्रति जनजागरण का कार्य कर रहे हैं। वे विभिन्न माध्यमों से लोगों को इस पहल से जोड़ रहे हैं और उन्हें अपनी भाषा के प्रति जागरूक कर रहे हैं।इस अभियान की एक विशेषता यह भी है कि इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से भागीदारी संभव है। लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी इस अभियान से जुड़ सकते हैं और हस्ताक्षर बदलने का संकल्प ले सकते हैं। इससे युवा वर्ग भी बड़ी संख्या में इस पहल से जुड़ रहा है और अपनी भाषा के प्रति गर्व महसूस कर रहा है। अंततः यह कहा जा सकता है कि “हस्ताक्षर बदलो अभियान” केवल हस्ताक्षर बदलने का अभियान नहीं है, बल्कि यह स्वभाषा, स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का एक सशक्त आंदोलन है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने हस्ताक्षर हिन्दी या किसी भारतीय भाषा में करना शुरू कर दे, तो यह हमारी भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। छोटी-छोटी पहलें ही आगे चलकर बड़े सामाजिक परिवर्तन का आधार बनती हैं, और यह अभियान उसी दिशा में एक प्रेरणादायक प्रयास है।

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