जनसमर्थन अभियान

जनसमर्थन अभियान

भारत विविध भाषाओं और संस्कृतियों का देश है। यहाँ सैकड़ों भाषाएँ और बोलियाँ प्रचलित हैं, जो देश की सांस्कृतिक समृद्धि और बहुलता का प्रतीक हैं। भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में वर्तमान में 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त है, जबकि प्रशासनिक कार्यों के लिए हिंदी और अंग्रेज़ी का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। उल्लेखनीय है कि भारत की वर्तमान व्यवस्था में किसी एक भाषा को औपचारिक रूप से “राष्ट्रभाषा” घोषित नहीं किया गया है। इसी संदर्भ में हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के उद्देश्य से मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा देशव्यापी जनसमर्थन अभियान चलाया जा रहा है।

इस अभियान का नेतृत्व संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में संस्थान की एक समर्पित टीम पूरे देश में हिंदी के सम्मान और प्रतिष्ठा के लिए कार्य कर रही है। इस आंदोलन का उद्देश्य केवल हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की मांग करना ही नहीं है, बल्कि लोगों में अपनी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा के प्रति जागरूकता और गौरव की भावना भी विकसित करना है। संस्थान का मानना है कि हिंदी देश के अधिकांश भागों में समझी और बोली जाती है, इसलिए यह राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का एक प्रभावी माध्यम बन सकती है।

मातृभाषा उन्नयन संस्थान ने इस जनजागरण अभियान के लिए एक प्रेरक नारा भी दिया है- “हिंदी के सम्मान में, हर भारतीय मैदान में।” यह नारा हिंदी के प्रति सम्मान और जनभागीदारी की भावना को प्रोत्साहित करता है। इस अभियान के अंतर्गत संस्थान देशभर के नागरिकों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों से संपर्क कर रहा है। लोगों को पत्र, ईमेल तथा सोशल मीडिया के माध्यम से संदेश भेजकर हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के समर्थन में जुड़ने का आग्रह किया जा रहा है। इसके लिए संस्थान द्वारा एक समर्थन पत्र का प्रारूप भी तैयार किया गया है, जिसे इच्छुक नागरिक भरकर और हस्ताक्षर करके संस्थान को भेज सकते हैं।

संस्थान के “हिंदी योद्धाओं” की टोली देश के विभिन्न प्रांतों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। वे हिंदी प्रेमियों तक राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जैन का संदेश और अभियान से संबंधित सामग्री ईमेल, डाक तथा अन्य माध्यमों से पहुँचा रहे हैं। इसके साथ ही लोगों को हिंदी में हस्ताक्षर करने की प्रतिज्ञा पत्र और हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का समर्थन पत्र भी भेजा जा रहा है। प्राप्तकर्ता से अपेक्षा की जाती है कि वे इन पत्रों को भरकर हस्ताक्षर सहित वापस भेजें, ताकि उनका समर्थन इस अभियान में दर्ज किया जा सके।

अब तक इस अभियान को देश की 10,000 से अधिक प्रतिष्ठित हस्तियों का समर्थन प्राप्त हो चुका है। संस्थान का उद्देश्य इन सभी समर्थन पत्रों को संकलित कर देश के प्रधानमंत्री तक पहुँचाना है, जिससे हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने की मांग को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया जा सके।

डिजिटल युग में सोशल मीडिया की भूमिका को देखते हुए संस्थान के “संगणक योद्धा” भी सक्रिय हैं। वे ट्विटर, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से हिंदी के पक्ष में जनजागरण अभियान चला रहे हैं। इसके अलावा संस्थान देश की प्रमुख साहित्यिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक हस्तियों से भेंट कर उनसे भी समर्थन प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है। इस प्रकार मातृभाषा उन्नयन संस्थान का यह अभियान हिंदी के सम्मान, प्रतिष्ठा और राष्ट्रीय पहचान को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा सकता है। यदि इस प्रकार के प्रयासों में समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी बढ़ती है, तो निश्चित रूप से हिंदी के प्रति जागरूकता और सम्मान की भावना और अधिक मजबूत हो सकती है।

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