घर-घर पुस्तकालय अभियान
पुस्तकें मानव जीवन की सबसे अच्छी मित्र मानी जाती हैं। वे केवल ज्ञान प्रदान करने का माध्यम ही नहीं होतीं, बल्कि व्यक्ति के विचारों, संस्कारों और व्यक्तित्व के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जिस घर में पुस्तकों का वातावरण होता है और परिवार के सदस्य पढ़ने की आदत रखते हैं, वहाँ स्वाभाविक रूप से सकारात्मक सोच, अच्छे संस्कार और ज्ञान की परंपरा विकसित होती है। ऐसे घरों में बुरी आदतों को स्थान नहीं मिलता, शिक्षा का स्तर बढ़ता है, परिवार के संस्कार सुदृढ़ होते हैं और जीवन में उन्नति के अनेक अवसर भी उत्पन्न होते हैं। इसी विचार को साकार करने और समाज में पुस्तक संस्कृति को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा 20 मई 2025 से “घर-घर पुस्तकालय अभियान” आरम्भ किया गया।
इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य परिवारों, विशेषकर बच्चों और युवाओं को पुस्तकों से जोड़ना तथा प्रत्येक घर में एक छोटा-सा पुस्तकालय स्थापित करने के लिए प्रेरित करना है। आधुनिक समय में जहाँ डिजिटल माध्यमों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, वहीं पढ़ने की पारंपरिक आदत धीरे-धीरे कम होती जा रही है। इस स्थिति को देखते हुए मातृभाषा उन्नयन संस्थान ने यह पहल की, ताकि समाज में पुनः अध्ययन की संस्कृति को प्रोत्साहित किया जा सके और परिवारों में ज्ञान तथा संस्कारों का वातावरण तैयार हो सके।
“घर-घर पुस्तकालय अभियान” की राष्ट्रीय संयोजक भावना शर्मा हैं, जो वर्तमान में मातृभाषा उन्नयन संस्थान की राष्ट्रीय सचिव भी हैं। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में यह अभियान पूरे देश में निरंतर आगे बढ़ रहा है। इस अभियान के माध्यम से लोगों को यह प्रेरणा दी जा रही है कि वे अपने घर में पुस्तकों के लिए एक विशेष स्थान निर्धारित करें और वहाँ विभिन्न प्रकार की उपयोगी पुस्तकों का संग्रह करें। इन पुस्तकों में साहित्य, इतिहास, प्रेरक जीवनी, संस्कृति, धर्म-दर्शन, विज्ञान, सामान्य ज्ञान और बाल साहित्य जैसी विविध विषयों की पुस्तकें शामिल की जा सकती हैं।
इस अभियान की विशेषता यह है कि यह केवल पुस्तक संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से घर-परिवार में पढ़ने की आदत विकसित करने पर भी विशेष बल दिया जा रहा है। जब परिवार के सदस्य प्रतिदिन कुछ समय पुस्तक पढ़ने में लगाते हैं, तो इससे न केवल उनका ज्ञान बढ़ता है बल्कि बच्चों के मन में भी अध्ययन के प्रति रुचि उत्पन्न होती है। बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में पुस्तकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वे उनके विचारों को व्यापक बनाती हैं और उन्हें जीवन के सही मार्ग की प्रेरणा देती हैं।
“घर-घर पुस्तकालय अभियान” के माध्यम से वर्तमान में देशभर में दस हजार से अधिक निजी पुस्तकालय तैयार किए जा चुके हैं। इन पुस्तकालयों में अधिकांशतः हिंदी भाषा की पुस्तकें रखी गई हैं, जिससे हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। यह अभियान न केवल पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि मातृभाषा के प्रति सम्मान और भाषाई समृद्धता को भी सुदृढ़ कर रहा है।
संस्थान द्वारा इस अभियान को व्यापक रूप से सफल बनाने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है और उन्हें अपने घर में पुस्तकालय स्थापित करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही जिन परिवारों ने अपने घरों में पुस्तकालय तैयार किए हैं या करना चाहते हैं, उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए संस्थान के प्रकाशकीय प्रकल्प “संस्मय प्रकाशन” से प्रकाशित पुस्तकों पर विशेष छूट भी प्रदान की जाती है। इससे लोगों को अच्छी पुस्तकों को अपने निजी पुस्तकालय में शामिल करने का अवसर मिलता है।
इस अभियान की एक और उल्लेखनीय उपलब्धि यह है कि इसके माध्यम से मातृभाषा उन्नयन संस्थान के नाम एक विश्व कीर्तिमान दर्ज हुआ है। विश्व में पहली बार किसी संस्था द्वारा 10,000 से अधिक निजी पुस्तकालय घरों में स्थापित करवाने का कार्य किया गया है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान के प्रयासों का परिणाम है, बल्कि समाज में पुस्तक संस्कृति के प्रति बढ़ती जागरूकता का भी प्रमाण है। समग्र रूप से देखा जाए तो “घर-घर पुस्तकालय अभियान” ज्ञान, संस्कार और भारतीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है। पुस्तक संस्कृति का पल्लवन और पोषण होने से घर-परिवार के संस्कार सुरक्षित रहते हैं, और यही संस्कार भारतीयता को जीवंत बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। यदि समाज का प्रत्येक परिवार इस अभियान से प्रेरित होकर अपने घर में एक छोटा-सा पुस्तकालय स्थापित करे, तो निश्चित ही आने वाली पीढ़ियाँ ज्ञान, संस्कृति और मूल्यों की समृद्ध विरासत प्राप्त कर सकेंगी।

